Sunday, June 23, 2013

भयावह होंगे उत्तराखंड में मरने वालों के आंकड़े: शिंदे

भयावह होंगे उत्तराखंड में मरने वालों के आंकड़े: शिंदे

Sunday, 23 June 2013 10:33

सुनील दत्त पांडे 
देहरादून । केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शनिवार को कहा कि उत्तराखंड में मरने वालों की संख्या सामने आ रहे ताजा आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। उन्होंने संकेत दिए कि ये आंकड़े भयावह हो सकते हैं। बचाव अभियानों की समीक्षा के लिए शनिवार को यहां पहुंचे शिंदे ने इसे राष्ट्रीय संकट करार दिया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के काम में लगी एजंसियों के लिए तीन दिन की समय-सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की आपदा मैंने जीवन में पहली बार देखी है। वहीं, राहतकर्मियों को केदारनाथ मंदिर परिसर से 123 शव मिले, जिसे मिलाकर इस पर्वतीय हादसे में मरने वालों की तादाद बढ़कर 680 हो गई। 
राज्य के एक दिन के दौरे पर आए शिंदे ने कहा कि राहत कार्यों में लगी सेना, आइटीबीपी, सिविल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच और अधिक बेहतर तालमेल बिठाने के लिए सेवानिवृत्त केंद्रीय गृह सचिव राजीव दुग्गल को नोडल अधिकारी के रूप में देहरादून में सोमवार से तैनात किया जाएगा। जितने भी शव बरामद होंगे, उनका अंतिम संस्कार उन्हीं के मजहबों के मुताबिक किया जाएगा। सभी शवों की तस्वीरें खींचकर राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर डाली जाएंगी, जिससे उनकी पहचान संभव हो सके। शवों का डीएनए सुरक्षित रखा जाएगा। राहत कार्यों में किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जाएगी और ना ही पैसे की कमी होने दी जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बारे में कहा कि वे कड़ी मेहनत और लगन से राहत कार्यों को कराने में जुटे हैं। 
शिंदे हरिद्वार के उपनगर कनखल में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मिले और उनसे मृतकों के शवों के अंतिम संस्कार और केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाबत चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता बचाव कार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी मंत्री या विधायक हेलिकॉप्टर लेकर अपने क्षेत्र में नहीं उतरेगा। पत्रकारों से बात करने से पहले सचिवालय में शिंदे ने मुख्यमंत्री बहुगुणा के साथ बैठक कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित सेना, आइटीबीपी, एनडीआरएफ व गृह मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे। शिंदे ने कहा कि बचाव और राहत कार्यों के दूसरे चरण में पुनर्वास और निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए वन क्षेत्र में सड़कों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने सीमा सड़क संगठन को गुप्तकाशी से गौरीकुंड और विष्णुप्रयाग से बदरीनाथ तक सड़क सुविधा को बहाल करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने के आदेश दिए। 

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने आपदा, राहत और बचाव कार्यों के लिए केंद्र सरकार, सेना, आइटीबीपी और एनडीआरएफ का सहयोग देने के लिए शिंदे का आभार जताया। उन्होंने बताया कि बचाव कार्यों में सभी बलों को मिलाकर 4500 जवान और अधिकारी दिन-रात लगे हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 73 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया चुका है। इनमें से आठ हजार लोगों को सड़क मार्ग से उनके घरों की ओर भेजा गया है। केदारनाथ मार्ग पर अब तक गौरी गांव में 2500 और हेमकुंड के पास घांघरिया में 200 लोग रह गए हैं। आपदा प्रभावित हर व्यक्ति को अपने घर जाने के लिए दो हजार रुपए की मदद दी जा रही है। गुप्तकाशी में चार हजार लोग अभी भी फंसे हुए हैं। उत्तरकाशी हर्षिल से छह सौ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। गंगोत्री क्षेत्र में अगले दो दिनों में हालात पर काबू पा लिया जाएगा। बहुगुणा ने कहा-केदारनाथ को अब यात्रियों से पूरी तरह से खाली करा लिया गया है। अब बदीनाथ से यात्रियों को निकाला जाएगा, जहां तकरीबन 8,000 लोग फंसे हैं।
केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा कि राहत और बचाव अभियान के लिए जरूरत पड़ने पर और हेलिकॉप्टर मुहैया कराए जाएंगे। सेना के कमांडर एनएस बावा ने बताया कि जंगलचट्टी व गौरी गांव जैसे कुछ क्षेत्रों में बचाव अभियान में सेना को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इन स्थानों पर भोजन के पैकेट और दवाओं को पहुंचा दिया गया है। राज्य के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि शनिवार को बचाव राहत दल ने 1830 लोगों को बचाया है। सड़क मार्ग से 1900 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/1-2009-08-27-03-35-27/47552-2013-06-23-05-08-42

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