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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Sunday, June 23, 2013

केदारनाथ मंदिर में गर्भगृह, ‘स्वयंभू लिंग’ तक मलबा जमा, कई गांव तबाह: मुख्य तीर्थ पुरोहित

केदारनाथ मंदिर में गर्भगृह, 'स्वयंभू लिंग' तक मलबा जमा, कई गांव तबाह: मुख्य तीर्थ पुरोहित

Sunday, 23 June 2013 12:37

नयी दिल्ली । केदारनाथ मंदिर में गर्भगृह और भगवान शिव के 'स्वयंभू लिंग' तक मलबा जमा हो गया है।

उत्तराखंड में बारिश, अचानक आई बाढ़ के कारण त्रासदी का मंजर ऐसा भयावह और प्रलयंकारी है कि केदारनाथ मंदिर में गर्भगृह और भगवान शिव के 'स्वयंभू लिंग' तक मलबा जमा हो गया है, साथ ही आसपास के कई गांव बह गये हैं। केदारनाथ मंदिर के मुख्य तीर्थ पुरोहित दिनेश बगवाड़ी ने 'भाषा' को बताया ''मंदिर परिसर में मलबा काफी मात्रा में भरा हुआ है। मंदिर के 'गर्भ गृह' तक मलबे का अंबार लगा है। 'भगवान शिव के स्वयंभू ज्यार्तिलिंग' तक मलबा आ गया है। शिवलिंग का सिर्फ कुछ भाग ही दिखाई दे रहा है।'' 
उन्होंने कहा, ''मंदिर परिसर में मलबे के नीचे काफी संख्या में लोगों के शव हंै। भयानक दृश्य है, मैं इसे बता नहीं सकता। मेरे अपने परिवार के पांच लोगों की इस आपदा में मौत हो गई।'' 
बगवाड़ी उस शिष्टमंडल में शामिल थे, जिन्होंने शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भेंट की और इस आपदा के बारे में उनसे चर्चा की। 
यह पूछे जाने पर कि क्या अस्थायी तौर पर पूजा का स्थान बदलने पर विचार किया जा रहा है, उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त मुख्य पुजारी :जिन्हें रावल कहा जाता है: के हवाले से इस पर विचार करने की बात सामने आई है लेकिन यह इतना आसान नहीं है । इस बारे में अभी स्पष्ट रूप से कोई जानकारी नहीं है क्योंकि मंदिर परिसर तक पहुंचना और उसे बहाल करना पहली चुनौती और बड़ा काम है।  
मुख्य तीर्थ पुरोहित ने कहा कि आसपास के कई गांव जल की तेज धारा में बह गए हैं। कुछ लोगों के घर जो बचे हैं उनमें तीन फुट से अधिक तक मलबा भर गया है । कुछ नहीं बचा है, सब कुछ तबाह हो गया है। 
बगवाड़ी ने कहा कि पूजा की प्रक्रिया और स्थान परिवर्तन जैसे विषयों पर ब्रदी..केदारनाथ समिति निर्णय करती है लेकिन अभी चुनौती मंदिर परिसर में मलबे को साफ करना और वहां दबी लाशों को निकालना है। 
उत्तराखंड में अभी भी कई हजार लोग फंसे हुए हंै, बड़ी संख्या में लोग कुदरत के कहर में अपनी जान गंवा चुके है। कुछ खुशकिस्मत अपनी जानबचाकर लौटे तो हैं लेकिन कई ऐसे भी हंै जिन्होंने आंखों के सामने अपनों को मरते देखा।
केदारनाथ मंदिर के मुख्य तीर्थ पुरोहित ने कहा कि आपदा के बाद स्थिति ऐसी थी कि किसी ने लाशों के साथ रातें बितायीं तो किसी का हाथ छूटते ही उनके अपने पानी की तेज धारा में बह गए। 
उन्होंने कहा कि 16 जून को शाम करीब आठ बजे के बाद अचानक मंदिर के उच्च्पर वाले पहाड़ी भाग से पानी का तेज बहाव आता दिखा। इसके बाद तीर्थ यात्रियों ने मंदिर में शरण ली। रातभर लोग एक दूसरे को ढांढस बंधाते दिखे। अगले दिन सुबह फिर पानी की तेज धारा आई और इसमें सब कुछ तबाह हो गया। (भाषा)


बारिश के कारण थोड़ी देर के लिए निलंबित रहने के बाद बचाव अभियान बहाल हुआ

देहरादून । उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में खराब मौसम के कारण थोड़े समय तक निलंबित रहने के बाद आज सुबह हवाई बचाव अभियान 22 हजार से अधिक फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए फिर से बहाल हुआ। वहीं, आईटीबीपी के जवानों ने लोगों को वहां से निकालने का कार्य तेज करने के लिए पैदल रास्ते का निर्माण शुरू कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि कल से क्षेत्र में हल्की से मध्यम वर्षा की मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर वहां से लोगों को निकालने का काम तेज कर दिया गया है।
आईटीबीपी के डीआईजी अमित प्रसाद ने गौचर में संवाददाताओं से कहा कि बद्रीनाथ के निकट तकरीबन 50 किलोमीटर इलाके में पैदल पथ का निर्माण किया जा रहा है ताकि वहां से फंसे हुए तीर्थयात्रियों को निकाला जा सके।

उन्होंने कहा, ''ऐसा मौसम पर हमारी निर्भरता को कम करने के लिए किया जा रहा है। वह हवाई बचाव अभियान को बाधित कर सकता है। इन सड़कों का निर्माण मंदिर के निकट माना चौकी के पास किया जा रहा है। तकरीबन 200 आईटीबीपी जवान इस कार्य में शामिल हैं।''
तकरीबन 70 हजार पर्यटकों को अब तक सबसे बुरी तरह प्रभावित रूद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों से निकाला जा चुका है। इन जिलों में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर हंै।
पहाड़ी राज्य में पिछले सप्ताह राज्य में आई भीषणतम प्राकृतिक आपदाओं में से 40 से अधिक हेलिकॉप्टर और 10 हजार सैनिक और अर्द्धसैनिक बल के जवान बचाव अभियान में शामिल हैं। 
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि देहरादून और जोशीमठ में मध्यम वर्षा के कारण आज सुबह बचाव अभियान शुरू होने में विलंब हुआ लेकिन फिर बहाल हो गया क्योंकि तकरीबन एक घंटे बाद मौसम साफ हो गया।
इस बीच, कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने आज कहा कि केंद्र बारिश प्रभावित उत्तराखंड में व्यापक क्षति वाले इलाकों के पुनर्निर्माण के लिए दीर्घावधि की योजना पर काम कर रही है।
कांग्रेस महासचिव और कांग्रेस अध्यक्ष कार्यालय की प्रभारी सोनी ने यहां पहुंचने के बाद कहा, ''संकट की इस घड़ी में समूचा देश राज्य की जनता के साथ दृढ़ता से खड़ा है।''
उन्होंने बताया कि केदारनाथ मंदिर के निकट के क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और पुनरूद्धार के लिए एक दीर्घावधि की योजना पर काम चल रहा है। 
सोनी राज्य के पार्टी मामलों का प्रभार हासिल करने के बाद पहली बार यहां पहुंचीं। उनके साथ पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा भी बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए पहुंचे हैं।
आईटीबीपी डीआईजी ने कहा कि तकरीबन 500 तीर्थयात्री रूद्र प्रयाग के जंगल चट्टी इलाके में अब भी फंसे हो सकते हैं और उन्हें  यथाशीघ्र निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
केदारनाथ के निकट गौरी गांव और रामबाड़ा इलाके में दो हेलिपैडों का निर्माण किया जा रहा है। 
केदारनाथ इलाके से 123 शवों की बरामदगी के साथ इस अभूतपूर्व हादसे में मरने वाले लोगों की संख्या 680 हो गई है और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि जितने बड़े पैमाने पर तबाही मची है उसे देखते हुए मरने वालों की संख्या एक हजार हो सकती है।
बहुगुणा ने यह भी कहा कि केदारनाथ मंदिर की पुनर्बहाली सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सुझाव लेने के बाद यह काम किया जाएगा।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने यहां कहा कि ध्यान अब बद्रीनाथ पर केंद्रित हो गया है, जहां तकरीबन 7000 से 8000 लोग अब भी फंसे हुए हैं। केदारनाथ घाटी को फंसे हुए तीर्थयात्रियों से पूरी तरह खाली करा लिया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि उन्हें पर्याप्त खाद्य सामग्री और दवाएं प्रदान की जा रही हैं।
बहुगुणा ने कहा कि राज्य में विभिन्न स्थानों से शव बरामद किए जा रहे हैं। उनका पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार किया जाएगा और मृत आत्माओं की शांति के लिए इस त्रासदी के 13 वें दिन हरिद्वार में एक 'महायज्ञ' किया जाएगा।
यह सुझाव संत समाज ने कल उस वक्त दिया था जब बहुगुणा और केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उनसे मुलाकात की थी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद बहुगुणा से मुलाकात के दौरान बाढ़ में तबाह हुए केदारनाथ मंदिर का देश के आधुनिकतम मंदिरों में से एक के तौर पर पुनर्निर्माण करने में राज्य सरकार को हरसंभव मदद देने की पेशकश की थी। 

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