बादशाह और दीदी की युगलबंदी, माछ भात के रेसिपि का आखिर अंजाम क्या होगा!
मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
बिग बी अमिताभ के गुजरात के ब्रांड अंबेसडर बनने पर बड़ा हंगामा बरपा था। समाजवादी पार्टी के साथ मार्फत अमर सिंह बच्चन परिवार के रिश्ते बी सुर्खियों के सबब में शुमार होते रहे हैं। राजनीति से बच्चन का वैसे पुराना रिश्ता है गांधी नेहरु परिवार से उनके पिता की मित्रता और राजीव गांधी से दून स्कूल की दोस्ती के कारण। वे इलाहाबाद से कांग्रेस के सांसद भी बने थे। जया बच्चन फिर राज्यसबा में हैं। बालीवूड के बादशाह शाहरूख खान की इतनी लंबी चौडी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। एक स्वदेश को छोड़ दे तो उनकी बादशहत का जलवा मसाला फिल्मों में ही सुहाता है और वह जलवा रा- वन की औसत कामयाबी से फीका पड़ने लगा है। लेकिन राजनीति के पाले में बादशाह ने शायद बिग बी से बढ़कर करिश्मा कर दिखाया। अब बॉलीवुड 'किंग' शाहरुख खान वेस्ट बंगाल की ब्युटी को दुनिया भर में फेमस बनाने के लिए एक प्रोमोशनल फिल्म बनाएंगे। वह इस स्टेट के ब्रांड एंबेसडर हैं।किंग खान उस तरफ एक कदम बढ़ा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह कोलकाता और वेस्ट बंगाल के लोगों के बारे में पूरी दुनिया को बताना चाहते हैं।शाहरुख ने इस बारे में बताया, 'हम इस बारे में प्लान कर चुके हैं और इसे आगे ले जाएंगे।' कहते हैं कि वाम जमाने में तरह तरह शाहरुख को केकेआर के हितों की हिफाजत के लिए पापड़ बेलने पड़े। दादा यानी सौरभ गांगुली का वामशासन से अंतरंग ताल्लुक रहा है। दादा को कप्तानी से हटाने के बाद केकेआर के लिए दिक्कतें और बढ़ गयी थीं। पर शाहरुख ने कभी इस सिलसिले में जुबान नहीं खोली । लेकिन मौका आया परिवर्तन के साथ।दीदी के कहते ही वे बंगाल के ब्रांड एंबेसेडर बन गये। भाजीगर होने का इससे बेहतर सबूत क्या हो सकता है?
बालीवूड में अब बादशाह और दीदी की युगलबंदी की जोरदार चर्चा है और लोगों को दिलचस्पी यही है कि माछ भात के रेसिपि का आखिर अंजाम क्या होगा! जो भी हो, लोगों का सुझाव है कि प्रणव और मनमोहन के दीदी को मनाने की बादशाह की बाजीगरी का गुर जरूर सीख लेना चाहिए। बाजार के लिए जहां पग पग पर दीदी की जिद आर्थिक सुधार लागू करने में आड़े आ जाती है , वहीं अपने क्रिकेट कोरोबर में आंधी पानी के बीच दीदी को सीधे राइटर्स से इडन गार्डन ही नहीं ले गये, शाहरुख राइट्स के कैंटीन में दीदी का परोसा माछभात खाते हुए बंगाल के लिए कुछ भी करने के लिए दीदी से फिर फिर माछ भात की फरमाइश करके ऐसा समां बांधा कि कालबैशाखी में लगभग धुले हुए मैच में जान पड़ गयी। १९९६ में विश्व कप मैच समेत कोलकाता के दर्शकों के रिकार्ड के मद्देनजर यह चमत्कार है। बादशाह और दीदी ने साथ सा थ मैदान के च्क्कर बी काटे। हालांकि इरफान पठान के तीन छक्कों की बदौलत दिल्ली के वीरु ने य़ह मैच जीत लिया, पर अपने गृह नगर दिल्ली और बालीवूड की स्वप्न नगरी को हाशिे पर डालकर कोलकाता में क्रिकेट कारोबारी बने बादशाह की उपलब्धि इससे कम नहीं हो जाती।आईपीएल की टीम कोलकाता नाईट राइडर्स की टीम के को-ऑनर मालिक शाहरुख हैं। खबर है कि गुरूवार को शाहरुख खुद दीदी ममता बनर्जी से मिलने और मैच देखने का निमंत्रण देने राइटर्स बिल्डिंग गए।लोग तो कह रहे हैं कि उद्योग जगत की मुश्किलें आसान करने के लिए शाहरुख की सेवा कम से कम दीदी को मनाने के लिए ली जाएं, तो ाधा सरदर्द नवरत्न तेल के माफिक गायब हो जाये, जिसका कि शाहरुख विज्ञापन करते हैं।
बंगाल के ब्रांड एम्बेसडर शाहरूख खान ने आज कहा कि पश्चिम बंगाल से उनका गहरा नाता है और वह राज्य के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं।उन्होंने कहा, दीदी ने मुझसे जैसे ही कहा, मैं पश्चिम बंगाल का ब्रांड एम्बेसडर बनने को तैयार हो गया। दीदी ने शाहरूख को अपना भाई बताया।
शाहरुख ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं बंगाल का ब्रांड एम्बेसडर हूं। मैं बहुत खुश हूं। हम जल्द ही बंगाल के प्रोमोशनल शूट के बारे में तैयारी करेंगे।
शाहरुख फरवरी में राज्य का ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए तैयार हुए थे और उन्होंने इसके लिए कोई भी रकम नहीं ली थी लेकिन उनकी इस दरियादिली से उनकी आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को जरूर फायदा हो सकता है। अब राज्य सरकार से केकेआर को मनारंजन कर में छूट मिलने की संभावना बढ़ गई है। पिछले साल केकेआर ने मनोरंजन कर के तौर पर राज्य सरकार को 25 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके अलावा केकेआर ने बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (सीएबी) को ईडन गार्डन में मैच खेलने के एवज में 35 लाख रुपये दिए थे।उम्मीद है कि 1,000 रुपये से अधिक के टिकट पर हमें मनोरंजन कर से पूरी छूट मिलेगी। सरकार ने 900 रुपये से अधिक मूल्य के टिकट को मनोरंजन कर से मुक्त रखने की स्वीकृति दे चुकी है जिससे टिकट की कीमतें कम होकर 750 रुपये हो गई हैं।आईपीएल की शुरुआत से ही मनोरंजन का मुद्दा केकेआर को परेशान कर रहा है। शाहरुख खान ने वाम मोर्चा सरकार से भी कर में छूट की मांग की थी लेकिन तत्कालीन सरकार ने ऐसा करने से मना कर दिया। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्हें यह शहर अच्छा लगता है। यहां की कला व संस्कृति भी उन्हें अंदर तक प्रभावित करती है।
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Friday, April 6, 2012
बादशाह और दीदी की युगलबंदी, माछ भात के रेसिपि का आखिर अंजाम क्या होगा!
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