| Wednesday, 11 July 2012 11:44 |
पुष्परंजन पुरानी बातों से बाहर निकलते हैं और वर्तमान की चर्चा करते हैं। जर्मन साप्ताहिक 'फ्रैंकफर्टर आल्गेमाइने जोन्टाग त्साइटुंग' ने पंद्रह जून, रविवार के संस्करण में छापा कि ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद 2013 में राजनीति से निवृत्त हो रहे हैं। अगले साल की शुरुआत में अहमदीनेजाद का दूसरा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अहमदीनेजाद ने जर्मन साप्ताहिक से कहा था कि आठ साल बहुत हुए, अब मुझे विश्वविद्यालय में अकादमिक कार्य करने हैं। पचपन साल के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद हाइड्रोलिक इंजीनियर रह चुके हैं और 1997 में 'ट्रांसपोर्ट सिस्टम' पर शोध में उन्हें पीएचडी की उपाधि भी मिल चुकी है। लेकिन अमेरिका, इजराइल और पूरे यूरोप की नाक में दम करने वाले राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद क्या सिर्फ अकादमिक अभिरुचि के कारण राजनीति छोड़ रहे हैं, यह बात गले नहीं उतरती। लेकिन क्या अपने देश में राजनेता रिटायर होने की उम्र पर संजीदा होकर सोचते भी हैं? इस साल 24 मई को गुना से खबर आई कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह राजनीति से सेवामुक्त होने के बारे में गंभीर हैं। उन्होंने कहा, 'अब समय आ गया है कि हमारी उम्र के नेता राजनीति से रिटायर हों और उनकी जगह नौजवान नेतृत्व संभालें।' दिग्विजय सिंह पैंसठ साल के हो चुके हैं। उनके प्रवचन का आशय यह तो नहीं था कि राजनीति से रिटायर होने की उम्र सीमा पैंसठ साल हो? यह बात भी आई-गई हो गई। 2004 में यही सवाल कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी उठाया था। सचिन पायलट को जैसे-तैसे शांत कराया गया। पिछले महीने राकांपा नेता शरद पवार ने बयान दिया कि 2014 का आम चुनाव नहीं लड़ेंगे। तो क्या वाकई पवार राजनीति से सेवानिवृत्त हो रहे हैं? कोई खास चुनाव नहीं लड़ना और राजनीति को हमेशा के लिए छोड़ देना, दो अलग-अलग बातें हैं। कहने के लिए दलाई लामा भी राजनीति से अवकाश ले चुके हैं, लेकिन आए दिन उनके राजनीतिक बयानों से शक होता है कि उन्होंने राजनीति से संन्यास लिया है। इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी उदाहरण के रूप में हैं। 30 दिसंबर 2005 को पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने मुंबई की सभा में विधिवत घोषणा की थी कि मैं राजनीति से रिटायर हो रहा हूं। तबसे शायद ही उन्होंने कोई राजनीतिक बयान दिया हो। फिर भी भाजपा के किसी बडेÞ बुजुर्ग नेता ने वाजपेयी का अनुसरण नहीं किया, न ही भारतीय जनता पार्टी ने कभी इस गंभीर विषय पर विचार किया। भारत में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पैंसठ वर्ष की उम्र में अवकाश ग्रहण करते हैं। अपने देश में यह शायद सेवानिवृत्त होने की अधिकतम उम्र सीमा है, जो सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के जजों को हासिल है। देश में लगभग सभी सरकारी या कॉरपोरेट महकमों में सेवानिवृत्त होने की उम्र तय है। तो फिर राजनीति को ऐसा पवित्र स्थल क्यों बनाया गया है, कि इस पर बहस ही न हो? ठीक से सर्वेक्षण हो, तो 'डाइपर' पहन कर राजनीति करने वाले बुजुर्ग राजनेताओं की खासी संख्या निकल आएगी। 13 मई 2012 को संसद के साठवें स्थापना दिवस पर इसकी चर्चा होते-होते रह गई कि हमारे कितने सांसद, संसद की उम्र से भी ज्यादा के हैं। कई तो इतने बुजुर्ग हैं कि चलने-फिरने में लाचार हैं, लेकिन मंत्री, राज्यपाल या लाभ वाले बडेÞ पद का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। यहां मेरी मंशा बढ़ती उम्र या बीमार, बुजुर्ग राजनेताओं पर तंज करना नहीं है। देश में शायद ही किसी ने कम उम्र के व्यक्ति को राज्यपाल के पद पर देखा हो। इसलिए यह सिर्फ नारा भर रह गया, 'सिंहासन खाली करो, कि जनता आती है।' दूसरी पीढ़ी के अधिकतर नेता इंतजार में ही उम्र गंवा देते हैं। यह गौर करने की बात है कि दुनिया के जिस हिस्से में भी राजनेताओं ने रिटायर होने की घोषणा की, उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की पूरी पारी खेली। तो क्या उनके रिटायर होने की घोषणा को हम बहुत बड़ा त्याग मान लें? सबके बावजूद राजनीति से अवकाश-प्राप्ति बहस का विषय तो है, मगर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त वाइएस कुरैशी इसे क्रेजी (पागलपन भरा) आइडिया कहते हैं। क्या सचमुच वैसा ही विचार है? |
This Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE. The style is autobiographical full of Experiences with Academic Indepth Investigation. It is all against Brahminical Zionist White Postmodern Galaxy MANUSMRITI APARTEID order, ILLUMINITY worldwide and HEGEMONIES Worldwide to ensure LIBERATION of our Peoeple Enslaved and Persecuted, Displaced and Kiled.
Wednesday, July 11, 2012
राजनीति से अवकाश क्यों नहीं
http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/20-2009-09-11-07-46-16/23893-2012-07-11-06-15-41
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment