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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Thursday, July 12, 2012

स्‍टेट मशीनरी को प्रभाव में लेकर भ्रष्‍ट कारपोरेट मीडिया ने दिखाया अपना का‍ला चेहरा : यशवंत

http://bhadas4media.com/edhar-udhar/5395-2012-07-12-13-17-01.html

[LARGE][LINK=/edhar-udhar/5395-2012-07-12-13-17-01.html]स्‍टेट मशीनरी को प्रभाव में लेकर भ्रष्‍ट कारपोरेट मीडिया ने दिखाया अपना का‍ला चेहरा : यशवंत  [/LINK] [/LARGE]

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Details Category: [LINK=/edhar-udhar.html]आवाजाही, कानाफूसी, सुख-दुख, इंटरव्यू...[/LINK] Published Date Written by B4M
: [B]भड़ास के चाहने वाले अपने तरीके से भ्रष्‍ट मीडिया, बेलगाम पुलिस और बिके सिस्‍टम की पोल खोलें [/B]: मैं जेल को इंज्‍वाय कर रहा हूं. मुझे खुशी है कि भड़ास की क्रांतिकारी पत्रकारिता के कारण भ्रष्‍ट कारपोरेट मीडिया ने अपना छुपा कालिख पुता चेहरा दिखा दिया है. उधार और चंदे के पैसे से चलाए जा रहे भड़ास के तेवर के कारण नानसेंस लिखे एमएमएस को छेड़छाड़ वाला एसएमएस और उधारी मांगने को रंगदारी मांगना बताना भ्रष्‍ट कारपोरेट मीडिया के लोगों की गहरी साजिश का हिस्‍सा है.

ये जेल में डलवाकर हमलोगों का मनोबल तोड़ना चाहते हैं, लेकिन जेल को भड़ास आश्रम मानकर मैं यहां ज्‍यादा ऊर्जा ग्रहण कर रहा हूं. उम्‍मीद है कि भड़ास के चाहने वाले इस मुश्किल वक्‍त में भी भड़ास और हमलोगों के साथ खड़ा रहेंगे. भड़ास और हमलोगों पर पहले भी कई आरोप, मुकदमे आदि लगते रहे हैं और यह क्रम अब तेज हो गया है. भड़ास का काम जारी रहेगा. स्‍टेट मशीनरी को प्रभाव में लेकर जिस कदर चौतरफा उत्‍पीड़न किया जा रहा है वह यह बताने के लिए पर्याप्‍त है कि सच लिखने वालों, बोलने वालों को इस सिस्‍टम में क्‍या क्‍या झेलना पड़ता है.

आलोक तोमर को तिहाड़ जेल भिजवाया गया. मुझे डासना जेल भिजवाया गया है. मुझे गर्व है कि मैं अपना काम करने के कारण जेल आया हूं. अब भड़ास के चाहने वालों की बारी है. आप सभी लोग अपने अपने स्‍तर से भ्रष्‍ट कारपोरेट मीडिया और बेलगाम पुलिस प्रशासन की पोल खोलें, उत्‍पीड़न के खिलाफ अभियान चलाएं. जेल में मैं एक बेहद नई व कौतूहलपूर्ण दुनिया से रूबरू हूं. कई साथी मित्र बन चुके हैं. बाहरी दुनिया और जेल की दुनिया में मेरे लिए बस है कि यहां लैपटॉप नहीं है, बाकी फकीर को क्‍या चाहिए, जहां पहुंच गए वहीं डेरा.

जेल में एक संपूर्ण जिंदगी है, जिसमें सभी शेड्स हैं. लग ही नहीं रहा कि यहां पहली दफा आया हूं. हर कोई अपना सा जान पड़ता है. सबकी तकलीफें अपनी जान पड़ती हैं. उनकी हंसी-खुशी यहां जीने की प्रेरणा देती है. ढेर सारे अभागों, गरीबों, कमजोरों को बेवजह फंसाकर जेल में भेजा गया है. इनमें से कई लोगों की तो पैरवी करने वाले तक नहीं हैं, घर-परिवार वाले भी नाता तोड़ चुके हैं. ऐसे लोगों का नाम, नम्‍बर नोट कर रहा हूं ताकि बाहर निकलकर इनकी पैरवी की जा सके और उन्‍हें न्‍याय दिलाया जा सके. यहां लोगों के इतने गम हैं कि मेरा कोई अपना गम है ही नहीं.

इन सभी साथियों का हृदय से आभारी हूं, जो इस वक्‍त हम लोगों के साथ किसी न किसी रूप में खड़े हैं. भड़ास जब शुरू किया गया तभी पता था कि कारपोरेट व सिस्‍टम के दैत्‍यों के हमलों का हम लोगों को सामना करना पड़ेगा. जेल जाने के लिए मैं मानसिक रूप से पहले से ही तैयार था, इसीलिए जेल भिजवाए जाने पर मुझे कुछ भी अजीब नहीं लगा. भड़ास एक पारदर्शी और खुला मंच है. सैकड़ों बार रिश्‍वत की पेशकश हुई होगी लेकिन हम लोगों ने चंदा, उधार, मदद आदि के जरिए इस मंच को चलाना उचित समझा और आगे भी यही करेंगे. अदालत में लड़ाई लड़ी जाएगी और जीत हासिल करेंगे क्‍योंकि सच को दबाया जा सकता है, हराया नहीं जा सकता. सत्‍यमेव जयते.

[B]बुधवार को ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित कोर्ट में पेशी के दौरान यशवंत सिंह से की गई बातचीत पर आधारित.[/B]

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