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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Friday, July 13, 2012

14 साल जेल में बिताने वाले बेगुनाह ‘मोहम्मद आमिर’ को जन मित्र पुरस्कार

http://beyondheadlines.in/2012/07/14-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%87/

14 साल जेल में बिताने वाले बेगुनाह 'मोहम्मद आमिर' को जन मित्र पुरस्कार

ए. एन. शिबली

आखिरकार निर्दोष होने के बावजूद आतंकवाद के आरोप में 14 साल जेल में बिताने वाले मोहम्मद आमिर के दर्द को किसी ने समझा.

उल्लेखनीय है कि इस साल जनवरी में जब मोहम्मद आमिर विभिन्न जेलों में 14 साल गुजार कर रिहा हुए तो एक तरफ जहां अन्य समाचार पत्रों, वेबसाइटों ने इन 14 सालों के दौरान आमिर की विभिन्न समस्याओं के संबंध में बहुत कुछ प्रकाशित किया, वहीं दूसरी तरफ मैंने  मोहम्मद आमिर के घर जाकर उनसे मुलाकात,  उनकी बीमार मां को देखा और ऐसी खबरें प्रकाशित कीं कि अब जबकि मोहम्मद आमिर निर्दोष होने के बावजूद 14 साल जेल में गुजार कर आया है और  इस दौरान उनका सब कुछ बर्बाद हो चुका है तो ऐसे में भारत के  कोने-कोने में काम करने वाले मुस्लिम संगठनों को चाहिए कि उनकी मदद करें. इस खबर के बाद भारत कि एक बड़ी मुस्लिम जमात ने आमिर की थोड़ी बहुत मदद की लेकिन उसे उचित नहीं कहा जा सकता. बाकी अन्य संगठनों का हाल यह रहा कि उन्होंने आमिर की मदद करना तो दूर उस से  बात भी नहीं की और उसकी परेशानियों को जानना उचित नहीं समझा.

कुछ संगठनों ने आमिर का उल्लेख केवल सेमिनारों में किया.  ऐसे ही एक सेमिनार के दौरान नई दिल्ली में मोहम्मद आमिर ने खुद भाषण करते हुए कहा कि यहां इस कार्यक्रम के दौरान जो लोग भी बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं उनमें से एक ने भी न तो मेरी इस दौरान  सहायता की जब मैं गिरफ्तार हुआ और न अब मेरी रिहाई के बाद किसी ने मेरी खैरियत पूछी है. इस कार्यक्रम के दौरान मोहम्मद आमिर ने जो दर्दनाक  कहानी सुनाई उसे सुनकर श्रोताओं में से कई रोने लगे मगर वहां मौजूद कई संगठनों में से  किसी ने भी आमिर की मदद करना उचित नहीं समझा. मिल्ली कौंसिल के ज़रिया आयोजित इस  कार्यक्रम के दौरान लेनिन  रघुवंशी नाम का एक ऐसा व्यक्ति मौजूद था जिसे आमिर की दर्दनाक कहानी को सुन कर रहा नहीं गया और उसने उसी दिन फैसला किया कि मैं आमिर को पुरस्कार दूंगा और जो भी संभव होगा वित्तीय मद भी करूंगा.

आज नई दिल्ली में एक समारोह के दौरान लेनिन रघुवंशी के ही संगठन प्यूपूल विजिलेंस कमिटी ऑन ह्यूमन राईडस (पी.वी.सी.एच.आर.) ने मोहम्मद आमिर को पुरस्कार से नवाजा और 60 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी की. पी.वी.सी.एच.आर. के एक्ज़ेक्यूटिव निर्देशक  लेनिन रघुवंशी ने  कहा कि अगर हम आमिर जैसों की मदद नहीं करेंगे तो और किसकी करेंगे. उन्होंने आमिर की तारीफ करते हुए कहा कि निर्दोष होने के बावजूद 14 साल जेल में बिताने वाले मोहम्मद आमिर में गजब का जोश है उसे देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि यह लड़का 14 साल जेल में रह कर आया है. आमिर जब जेल गया तो न तो कंप्यूटर था और न ही मोबाइल. इसके बावजूद उसके काम करने का अंदाज़, उसका बात करने का सलीका  और कानून पर उसका भरोसा देख कर मैं हैरान हूँ. मुझे आश्चर्य है कि संविधान पर उसका जितना भरोसा है इतना मानव अधिकारों के लिए काम करने वाले बड़े लोगों को नहीं होता.

लेनिन ने कहा कि यह तो मामूली सहायता है. हमने फैसला किया है कि उन्हें हर महीने पाबंदी  से कुछ पैसे दिए जाएंगे और हम चाहेंगे  कि वह उन लोगों के बीच काम करें जो ऐसी ही साजिश का शिकार होते हैं और हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में आमिर भारत के  जिस शहर में भी जाएंगे पी.वी.सी.एच.आर. उनका खर्च वहन करेगी. लेनिन  ने कहा कि आमिर एक किताब भी लिखना चाहते हैं और हम उनकी किताब पूरी करने में मदद करेंगे.

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