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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Monday, July 9, 2012

अरब देशों तक जाती हैं तराई में बनी रजाई

अरब देशों तक जाती हैं तराई में बनी रजाई

तीन हजार से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार

घर बैठे रोजगार का जरिया बना हैंड कुल्टिंग
 
(रुद्रपुर से जहांगीर राजू)
दिनेशपुर में रजाई तैयार करती महिलाएं।

दिनेशपुर, रुद्रपुर, शाक्तिफार्म, खटीमा व आसपास के क्षेत्रों में बनने वाली रजाई अरब देशों तक निर्यात की जाती हैं। फैक्ट्री से सामान लाकर महिलाएं घर बैठे तगाई कर रजाईतैयार करती हैं। जिससे उन्हें हर रोज 150 से लेकर 250 रुपये तक की कमाई हो जाती है। क्षेत्र में तीन हजार से अधिक महिलाएं इस रोजगार से जुड़ी हुई हैं।बंगाली बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण दिनेशपुर में हैंड कुल्टिंग का सबसे अधिक काम होता है। यहां घर-घर में महिलाएं हैंड कुल्टिंग का कार्य करती हैं। सिंगल बैड की रजाई तैयार करने में उन्हें प्रति रजाई 8५ रुपये मिलते हैं। एक दिन में एक महिला तीन रजाई की तगाई कर 250 रुपये तक आसानी से कमा लेती हैं। इसी तरह से डबल बैड की रजाई की तगाई करने में दो महिलाओं को पूरा दिन लगा जाता है। यह रजाई तैयार कर उन्हें 450 रुपये मिलते हैं। इस प्रकार देखा जाए बगैर कोई लागत लगाये महिलाएं हैंड कुल्टिंग से 150 से लेकर 250 रुपये तक आसानी से कमा लेती हैं। रजाई तैयार करने के लिए उन्हें सारा सामान एक्सपोर्टर कंपनियों से घर पर ही मिल जाता है। दिनेशपुर के साथ ही रुद्रपुर, शक्तिफार्म, खटीमा व आसपास के क्षेत्रों में भी इसका कारोबार बढऩे लगा है। रुद्रपुर में भी दर्जनों घरों में हैंड कुल्टिंग का कार्य किया जाता है। इसके साथ ही यहां कई रजाई सेंटर चल रहे हैं। जहां आकर महिलाएं दिनभर रजाई का कार्य करती हैं।
एक्सपोर्ट क्वालिटी की रजाईयों की बढ़ती मांग को देखते हुए सिडकुल में रजाई बनाने वाली दो बड़ी कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं। जिसमें एक हजार से अधिक महिलाएं काम करती हैं।

तराई की रजाईयों की विदेशों में मांग


रुद्रपुर। तराई में बनने एक्सपोर्ट क्वालिटी की रजाई की मांग लगातार बढ़ रही हैं। तराई में तैयार की जानी वाली इन रजाईयों को फैक्ट्री मालिक दिल्ली की मंडी तक भेजते हैं। जहां से एक्सपोर्टर उसे जापान, अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा व श्रीलंका आदि देशों को निर्यात करते हैं। विदेशों में जाने बिकने वाली इन रजाईयों की कीमत 5 से लेकर 25 हजार रुपये तक होती है। क्षेत्र में तैयार होने वाली खुबसूरत कढ़ाईदार रजाईयों की अरब देशों में सर्वाधिक मांग है।


एक्सपोर्टरों को मलाई, महिलाओं को मात्र रोटी

रुद्रपुर। रजाई उत्पादन में लगे बड़े एक्सपोर्टर इससे बड़ा मुनाफा कमाते हैं, लेकिन इस काम में लगी दिन रात पसीना बहाने वाली महिलाओं को मात्र दो वक्त की रोटी ही आसानी से मिल पाती हैं। इस काम में एक्सपोर्टर जहां एक रजाई को विदेशों में बेचकर पांच हजार रुपये तक का मुनाफा कमाते हैं वहीं महिलाओं को मात्र 150- से 250 रुपये तक ही मिल पाते हैं। सरस्वती मंडल, नेहा वैद्य, श्यामली देवी बताती हैं कि दिनभर पसीना बहाने के बाद 150 रुपये तक की कमाई होती हैं। उन्होंने कहा कि इस रोजगार से जुड़ी महिलाओं की मजदूरी और अधिक बढऩी चाहिए।
http://dewalthalpost.blogspot.in/2011/06/blog-post_29.html

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