| Monday, 22 July 2013 10:02 |
जनसत्ता ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार ने राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए चुनावी ट्रस्ट कंपनियों के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। ऐसी कंपनियों को विभिन्न राजनीतिक दलों को दिए गए धन या चंदे पर कर लाभ मिलेगा। इस नए कदम के तहत इकाइयों को गैर लाभकारी कंपनियों को अपने नाम के तहत निर्वाचक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत कराने की इजाजत होगी। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों के लिए नाम उपलब्धता दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है जिससे उनके लिए ऐसी इकाइयों का पंजीकरण आसान हो जाएगा। इसके अलावा वे कोई भी योगदान नकद में प्राप्त नहीं कर सकती। उन्हें योगदान देने वाले देश में रहने वाले लोगों का स्थायी खाता संख्या (पैन) लेना होगा। वहीं प्रवासी भारतीयों से चंदा लेते समय उनका पासपोर्ट नंबर लेना होगा। इन निर्वाचन ट्रस्ट कंपनियों को विदेशी नागरिकों या कंपनियों से योगदान लेने की इजाजत नहीं होगी। कई उद्योग घराने मसलन टाटा, आदित्य बिड़ला समूह और भारती समूह अपने ट्रस्टों के माध्यम से राजनीतिक दलों को धन देते रहे हैं। हालांकि, इस तरह की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसी के मद्देनजर सरकार इस बारे में कुछ अधिक स्पष्ट नियमन लेकर आई है। http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/1-2009-08-27-03-35-27/49223-2013-07-22-04-33-37 |
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Monday, July 22, 2013
राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कवायद
राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कवायद
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