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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Sunday, May 13, 2012

आदिवासी संस्कृतिकर्मी को पुलिस ने किया अगवा

आदिवासी संस्कृतिकर्मी को पुलिस ने किया अगवा



उत्पल झारखंडियों के विख्यात क्रान्तिकारी सांस्कृतिक संगठन झारखंड एभेन में काम कर रहे हैं. सांस्कृतिक कार्यकर्ता जीतन मरांडी की गिरफ्तारी के बाद से उत्पल ही इस संगठन का संचालन कर रहे हैं . वे एक गायक और गीतकार हैं...

आदिवासी संस्कृतिकर्मी उत्पल (23) को झारखंड पुलिस ने 7 मई 2012 को डुमरी पुलिस थाना क्षेत्र में उस समय गैर कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया, जब वह रांची से गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में बस से जा रहे थे. झारखंड पुलिस ने अभी तक उन्हें न तो रिहा किया है और न किसी अदालत में पेश किया है. हैदराबाद में 22-23 अप्रैल 2012 को सम्पन्न हुए क्रान्तिकारी जनवादी मोर्चा(आरडीएफ़)   के प्रथम सम्मेलन में उत्पल अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य चुने गए थे.

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उत्पल झारखंडियों के विख्यात क्रान्तिकारी सांस्कृतिक संगठन झारखंड एभेन में काम कर रहे हैं. सांस्कृतिक कार्यकर्ता जीतन मरांडी की गिरफ्तारी के बाद से उत्पल ही इस संगठन का संचालन कर रहे हैं . वे एक गायक और गीतकार हैं. वे झारखंड एभेन की स्थानीय टीम से मुलाकात करने के लिए ही रांची से डुमरी जा रहे थे. गांव में पहुंचने से पहले ही 7 मई की सांय 3 बजे पुलिस ने उन्हें बस से अगवा कर लिया.

यह पहली बार नहीं है कि उत्पल को पुलिस ने गैरकानूनी हिरासत में लिया हो. जीतन मरांडी की गिरफ्तारी के कुछ माह बाद ही पुलिस ने गुंडों के जरिए उत्पल को अगवा कर लिया था तथा कई दिनों तक उसकी भनक तक नहीं लगने दी थी. बाद में उन पर फर्जी मुकदमा बनाकर जेल में बंद कर दिया. कई माह बाद उन्हें हाईकार्ट से जमानत मिली. परन्तु जेल से रिहाई के पूर्व ही पुलिस ने उन पर दमनकारी कानून गैरकानूनी गतिविधी रोकथाम अधिनियम ( यूएपीए) के तहत केस दर्ज कर दिया और उन्हें इस खतरनाक कानून की विभिन्न प्रावधानों के तहत साल भर क्रूर और अन्यायी कारावास झेलनी पड़ी. उत्पल हाल ही में जमानत पर जेल से रिहा हुए थे. जेल से आते ही उन्होनें जीतन मरांडी की मौत की सजा के खिलाफ अभियान में सक्रिय भूमिका अदा की थी.

आरडीएफ अपने कार्यकारिणी सदस्य उत्पल को झारखंड पुलिस द्वारा गैरकानूनी हिरासत में रखने की भत्र्सना करता है और मांग करता है कि उन्हें तुरन्त बेशर्त रिहा किया जाए. हम सभी जनवादी संगठनों और बुद्धिजीवियों से अपील करते हैं कि झारखंड पुलिस की इस गैरकानूनी कार्रवाई के खिलाफ आवाज बुलंद करें और दोषी पुलिस कर्मियों को सजा देने की मांग करें.

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