कोल पूल प्राइसिंग को सीसीईए की मंजूरी!कोल इंडिया 78,000 मेगावॉट के एफएसए करार करेगी।
आखिरकार जबर्दस्त कारपोरेट लाबिइंग ही निर्णायक साबित हुई और राहत टाटा पावर, अदानी पावर, सीईएससी, जीएमआर इंफ्रा और रिलायंस इंफ्रा जैसी कंपनियों को!यह कोलगेट प्रकरण का दूसरा चरण है।आयातित कोयले को घरेलू में मिलाकर उसकी कीमत तय करने 'कोल पूल प्राइसिंग' की योजना को लेकर ममता बनर्जी और मुलायम सिंह यादव के विरोध को केंद्र ने दरकिनार कर दिया है।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
आयातित कोयले को घरेलू में मिलाकर उसकी कीमत तय करने 'कोल पूल प्राइसिंग' की योजना को लेकर ममता बनर्जी और मुलायम सिंह यादव के विरोध को केंद्र ने दरकिनार कर दिया है। तैयार हो जाओ, फिर महंगी होने वाली है 'बिजली'! आखिरकार जबर्दस्त कारपोरेट लाबिइंग ही निर्णायक साबित हुई और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीईए) ने कोल पूल प्राइसिंग को मंजूरी दी है। इंपोर्टेड कोल से बिजली उत्पादन पर होने पर कोयले की बढ़ी कीमत का बोझ ग्राहकों पर डाला जाएगा। इससे बिजली महंगी होने की आशंका है।वहीं कोल इंडिया 78,000 मेगावॉट के एफएसए करार करेगी।इस योजना के तहत कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) बिजली परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर कोयला उपलब्ध कराएगी। कोल इंडिया पावर कंपनियों को इंपोर्टेड कोयला बढ़ी लागत के साथ सप्लाई कर सकती है जिसका बोझ कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं।सरकार के इस फैसले से 2009 के बाद बने 78000 मेगावॉट क्षमता के पावर प्लांट को फायदा होगा। ऐसे में निजी क्षेत्र की टाटा पावर, अदानी पावर, सीईएससी, जीएमआर इंफ्रा और रिलायंस इंफ्रा जैसी कंपनियों को राहत मिलेगी।यह कोलगेट प्रकरण का दूसरा चरण है।इससे बिजली महंगी होने की आशंका है।आयात किये जाने वाले कोयले से बिजली उत्पादन करने में बिजली के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।सीसीईए ने प्राकृतिक गैस की कीमतों में मू्ल्यवृद्धि पर फैसले को स्थगित कर दिया है। सरकार के इस फैसले से बिजली कंपनियों के शेयर भाव में मजबूती का रुख है।इस खबर के बाद बीएसई में टाटा पावर (Tata Power) का शेयर 0.68% तक ऊपर चढ़ गया।
पश्चिम बंगाल सरकार ने इसका खुलेआम विरोध कर दिया है। वहीं, मुलायम ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इससे निजी क्षेत्र को लाभ पहुंचाने का आरोप जड़ दिया है। उड़ीसा और मध्य प्रदेश पहले ही इसका विरोध कर चुके हैं। देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी कोल इंडिया के निदेशक बोर्ड की बैठक में इस नीति का विरोध किया गया। कंपनी का कहना है कि इससे उसके मुनाफे पर असर पड़ेगा। कोयला मंत्रालय भी बेमन से ही तैयार हुआ है।माना जाता है कि कोल पूल प्राइसिंग से देश में बिजली की लागत भी बढ़ेगी। बंदरगाहों से दूरी वाली बिजली परियोजनाओं का खर्चा बढ़ेगा। जाहिर है कि बढ़ी लागतों का बोझ अंतत: ग्राहकों को ही उठाना पड़ेगा। अभी देश में 85 फीसद कोयला घरेलू क्षेत्र से आता है, जबकि 15 प्रतिशत आयातित होता है। आयातित कोयला ज्यादा महंगा है। इन दोनों के दाम मिलाकर कोयले की कीमत तय करने से उन बिजली संयंत्रों को घाटा होगा, जो सिर्फ घरेलू क्षेत्र से कोयला लेते रहे हैं। कोयला कीमत का यह फार्मूला अप्रैल, 2009 के बाद शुरू होने वाले बिजली संयंत्रों पर लागू होगा।वित्त मंत्री ने न केवल बिजली क्षेत्र की ईंधन समस्या और वितरण इकाइयों की खराब वित्तीय हालत को स्वीकार किया बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र के विकास के लिए नए प्रोत्साहन उपायों की घोषणा की। चिदंबरम ने कोयला उत्पादन में इजाफा करने के लिए पीपीपी मॉडल और कोल पूल प्राइसिंग को जल्द लागू किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही वितरण इकाइयों के कर्ज पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित किए जाने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त पिछले साल सितंबर में सरकार ने राज्य बिजली बोर्डों के लिए मार्च 2011 तक की अवधि के लिए 1.9 लाख करोड़ रुपये के कर्ज पुनर्गठन को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत अल्पकालिक कर्ज का 50 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारों को वहन करना था जबकि बाकी का कर्ज पुनर्भुगतान और मूल कर्ज राशि के भुगतान पर रोक लगाकर वसूला जाना था।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा,'अंधकार में रहने से बेहतर है कि थोड़ा अधिक बिल भुगतान कर बिजली हासिल की जाए।'सरकार ने कोल पूल प्राइसिंग को मंजूरी देकर बिजली कंपनियों को बड़ी राहत दी है। यह पावर कंपनियों, पावर फाइनेंस कंपनियों और पीएसयू बैंकों को लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे आनेवाले समय में इन सबको अच्छा फायदा होगा।साथ ही आरईसी, आईडीएफसी और पीएफसी को भी फायदा हो सकता है। इसके अलावा कोल पूल प्राइसिंग से कैपिटल गु्ड्स कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस निर्णय से देश में 78 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन हो सकेगा। इस योजना के तहत कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) बिजली परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर कोयला उपलब्ध कराएगी।घरेलू उपलब्धता और वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीआईएल बिजली कंपनियों के साथ ईंधन आपूर्ति समझौते (एफएसए) पर हस्ताक्षर करेगा।वित्त मंत्री सीसीईए बैठक के फैसलों पर जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल हाईवे-148डी की 2-लेनिंग को मंजूरी दी गई है। सीसीईए ने मौजूदा पावर प्रोजेक्ट्स के लिए आर-एपीडीआरपी जारी रखने को मंजूरी दी है।
पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली के मौजूद न रहने से आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति [सीसीईए] ने प्राकृतिक गैस की कीमतों में 60 फीसद तक की बढ़ोतरी करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी आयातित कोयले के दामों पर निर्भर करेगी, लेकिन कम से कम 15 से 17 पैसे प्रति यूनिट बिजली महंगी होना तय है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में सीसीईए ने कोयला मंत्रालय के इस प्रस्ताव को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। बैठक के बाद कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बिजली दरें बढ़ने की आशंका की पुष्टि करते हुए कहा, 'बिजली महंगी तो होगी, लेकिन मिलेगी तो।' वैसे, बाद में वित्त मंत्री ने कोयला मंत्री के बयान पर लीपापोती करते हुए सफाई दी कि बिजली की कीमतों में मामली बढ़ोतरी ही होगी। लेकिन यह अलग-अलग प्लांट पर निर्भर करेगी। सरकार के इस फैसले के बाद अब निजी बिजली उत्पादक कंपनियां खुद अपनी जरूरत के मुताबिक कोयला आयात कर सकेंगी। लेकिन अगर वे चाहेंगी तो कोल इंडिया भी उनके लिए कोयला आयात कर सकती है। ऐसी स्थिति में बिजली कंपनियों को बढ़ी हुई लागत अपने उपभोक्ताओं के साथ बांटनी होगी। चिदंबरम ने कहा कि बिजली नहीं होने से अच्छा है कि कुछ अधिक दाम देकर बिजली उपलब्ध कराई जाए। बिजली प्लांट लगाने में इन कंपनियों ने भारी निवेश किया है। प्रत्येक मेगावाट के लिए कम से कम 5-6 करोड़ रुपये की लागत आती है। आज की तारीख में बिजली प्लांट चलाने के लिए कोयला आयात का कोई विकल्प नहीं है। आयातित कोयला हमेशा घरेलू से महंगा होता है। सरकार कोल इंडिया के जरिये 78 हजार मेगावाट की क्षमता के लक्ष्य को पाने के लिए प्रत्येक प्लांट को इस साल 65 और 75 फीसद बारहवीं योजना के अंत तक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करा रही है। कोयले और गैस की कमी की वजह से देश में बिजली पैदा करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। आयातित कोयले की कीमत को ग्राहकों के साथ बांटने का प्रस्ताव 2009 के बाद लगे 78,000 मेगावाट की क्षमता के प्लांटों पर लागू होगा। इससे पहले सरकार ने कोयले की पूल प्राइसिंग और नए बिजली प्लांट को घरेलू कोयले की आपूर्ति की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
एसोसिएशन ऑफ पावर प्रड्यूसर्स के डायरेक्टर जनरल, अशोक खुराना का कहना है कि सरकार के फैसले से कंपनियों और ग्राहकों दोनों को फायदा होगा।
अशोक खुराना के मुताबिक कोयले की कमी की वजह से पावर प्लांट पूरी क्षमता पर काम नहीं कर रहे हैं। इंपोर्टेड कोयले की वजह से बिजली की दरों में 20-25 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी होगी।
12वीं पंचवर्षीय योजना के अगले चार सालों में कोल इंडिया इन कंपनियों को घरेलू उत्पादन का 65 से 75 फीसदी तक कोयला मुहैया कराएगी। इससे ज्यादा कोयले की जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियों को कोयला आयात करना होगा।
कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी यह स्वीकार किया कि इस फैसले से बिजली परियोजनाओं के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही बिजली दरों में निश्चित रूप से इजाफा होगा।
ऊर्जा सचिव का कहना है कि पावर कंपनियां जितने कोयले की कमी होगी, उतना इंपोर्ट कर पाएंगी। अगर थोड़ा ज्यादा पैसा देकर बिजली की सप्लाई पूरी हो तो ये ज्यादा बेहतर है। इंपोर्टेड कोयले के दाम की समीक्षा रेगुलेटर करेगा और तय करेगा कि बिजली की दरें कितनी बढ़ेगी।
वहीं, 105 लाख टन गेहूं खुले बाजार में बेचने को मंजूरी दी गई है। गेहूं को 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर बेचा जाएगा। 85 लाख टन गेहूं पंजाब और हरियाणा से लिया जाएगा। हालांकि, अतिरिक्त गेहूं एक्सपोर्ट पर फैसला टाल दिया गया है।
सीसीईए ने नैचुरल गैस की कीमत बढ़ाने का फैसला टाल दिया है। उम्मीद थी कि नैचुरल गैस की कीमत मौजूदा 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ाकर 6.775 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की जा सकती है। लेकिन वित्त मंत्री ने कहा कि अगले हफ्ते होने वाली सीसीईए की बैठक में नैचुरल गैस की कीमत के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।
रंगराजन कमेटी की सिफारिश के आधार पर नैचुरल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव सीसीईए के सामने रखा गया था। माना जा रहा था कि नैचुरल गैस की बढ़ी हुई कीमत 1 अप्रैल 2014 से लागू की जाएगी।

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