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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Friday, June 21, 2013

एक साथ संकट में हैं कोयला,इस्पात और बिजली सेक्टर!ठीकरा कोल इंडिया पर ही फोड़ा जा रहा है।

एक साथ संकट में हैं कोयला,इस्पात और बिजली सेक्टर!ठीकरा कोल इंडिया पर ही फोड़ा जा रहा है।


विनिवेश, पुनर्गठन और विभाजन विवाद, कोयला मजदूरों और अफसरों की हड़ताल के संकट से डांवाडाल कोल इंडिया को आदिवासी इलाकों में खनन जारी रखने में भारी मुश्किल हो जाने का अंदेशा है।


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​



कोलइंडिया पर जहां कोयला आपूर्ति के लिए चौतरफा दबाव बना हुआ है, वहीं निजी कंपनियों को को कोयला आयात की छूट मिली हुई है। भारत सरकार की और से उग्रवाद से निपटने के लिए तरह के अभियान चलाये जा रहे हैं। लेकिन न भारत सरकार और राज्य सरकारों की ओर से कोयला माफिया के खिलाफ कोई अभियान चला या जा रहा है। सेल की लौह अयस्क खादानों की समस्या सुलझाने में सरकार नाकाम है।निजी इस्पात कारखानों को भी लौहअयस्क की वजह से मुश्किल का समाना करना पड़ रहा है। जहां केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने लौहअयस्क बहुल सारंडा के जंगल में दस साल के लिए खनन पर प्रतिबंध की मांग पहले ही कर दी है और अब केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री किशोर चंद्र देव ने सारंडा और दूसरे वन क्षेत्र में पांचवी अनुसूची का खुला उल्लंघन करके खनन जारी रखने के खिलाफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह,कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर विरोध जताया है।कोल इंडिया की तमाम खाने आदिवासी इलाकों और वन क्षेत्र में है और आदिवासी समाज उस पर अवैध खनन का आरोप लगाता रहा है। केंद्रीय मंत्रियों के बयानों से अब अवैध खनन का मामला तुल पकड़ने लगा है और एक साथ संकट में हैं कोयला,इस्पात और बिजली सेक्टर। मजे की बात तो यह है कि इस संकट का ठीकरा कोल इंडिया पर ही फोड़ा जा रहा है। विनिवेश, पुनर्गठन और विभाजन विवाद, कोयला मजदूरों और अफसरों की हड़ताल के संकट से डांवाडाल कोल इंडिया को आदिवासी इलाकों में खनन जारी रखने में भारी मुश्किल हो जाने का अंदेशा है।


कोयला ब्लाकों के आबंटन में विवाद की वजह से कोयला उत्पादन पहले से प्रभावित है। आबंटित ब्लाकों का विकास हुआ नहीं है,उत्पादन दूर की बात है।कोल गेट रहस्यअनुसंधान की गति देखते हुए जल्दी यह मामला सुलझने के आसार है नहीं, जबकि अब आदिवासी इलाकों और वनक्षेत्र में खनन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं ।स्वयं भारत के प्रधानमंत्री के हाथ भी कोयला की कालिख लग जाने से नीतिगत फैसलों में भी व्यवधान पड़ने से औद्योगिक गतिविधियों में भारी फर्क पड़ने का खतरा पैदा हो गया है और जाहिर सी बात है कि गरीब की जोरू कोल इंडिया को सबकी भौजी बनकर जीना है। इस बीच,सीबीआई ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के सिलसिले में गुरुवार को पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता से 7 घंटे से अधिक पूछताछ की। गुप्ता से 2006 से 2008 में उनके कार्यकाल के दौरान कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं के बारे में सवाल पूछे गए।प्रधानमंत्री कार्यालय के अफसरों से अलग पूछताछ हो रही है।पर्यावरण मंत्रालय पर कई आधारभूत संरचना परियोजनाओं को मंजूरी देने में देरी करने और देश का विकास बाधित करने का आरोप लगता रहा है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस आरोप को हालांकि खारिज किया है। पर्यावरण मंत्रालय  को जनजातीय मामलों के मंत्री वी. किशोर चंद्र देव से भी समर्थन मिला है, जिन्होंने पर्यावरण मंत्रालय को लिखा है कि कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए।


इस पर तुर्रा यह कि देश में आने वाले समय में बिजली की दरें कम से कम 15 से 17 पैसे प्रति यूनिट बढ़ सकतीं हैं। सरकार ने बिजली संयंत्रों को आयातित कोयले पर आने वाली अतिरिक्त लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।वित्त मंत्री पी़ चिदंबरम ने संवाददाताओं को बताया कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आयातित कोयले की लागत उपभोक्ताओं पर डालने के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी। इससे बिजली दरों में मामूली वृद्धि हो सकती है।


अपने मंत्रालय की नई वेबसाइट जारी करने के मौके पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जनजातीय मामलों के मंत्री किशोर चंद्र सिंह देव  ने कहा है, "नक्सलवाद सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है। कमजोर विकास भी इसका हिस्सा है। शुरू से ही मैं कह रहा हूं कि इस समस्या का समाधान करने के लिए हमें इसकी मूल जड़ को ध्यान में रखना होगा।"


नक्सल प्रभावित इलाकों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए देव ने कहा, "जनजातीय समुदाय का शोषण हुआ है और कई जनजातीय इलाकों में कोई विकास नहीं हुआ है। कमजोर शिक्षा, खराब स्वास्थ्य सुविधा, सड़क संपर्क का अभाव और पेयजल की कमी के अलावा भी समस्याएं हैं।"


देव ने कहा कि नक्सलियों से लड़ने के लिए बनाया गया असैन्य मिलीशिया, सल्वा जुडूम शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा, "सल्वा जुडूम किसी भी तरह से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। जनजातीय युवाओं को यातना शिविरों में रखना और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखना, अत्यंत बुरी घटना है।"


उन्होंने कहा, "जनजातीय समुदाय के लोग हमारे शत्रु नहीं हैं, बल्कि देश के नागरिक हैं और हमारे अद्धसैनिक बलों को केवल दुश्मनों से लड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन इलाकों में विकास की कमी, ऐसे हमलों की वजह है।"


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