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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Friday, June 21, 2013

स्त्री उत्पीड़न के विरुद्ध बंगाल में अराजनीति विरोध की राजनीति तेज, सिविल सोसाइटी में बिखराव

स्त्री उत्पीड़न के विरुद्ध बंगाल में अराजनीति विरोध की राजनीति तेज, सिविल सोसाइटी में बिखराव


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​



बंगाल में नागरिक समाज दलों के दलदल से निकाल नहीं पा रहा है और स्त्री उत्पीड़न के विरुद्ध बंगाल में अराजनीति विरोध की राजनीति तेज होने लगी है। वहींकल शाम कालेज स्क्वायर में धरना और आज कालेज स्क्वायर से लेकर मेट्रोचैनल तक निकले महाजुलूस में सिविल सोसाइटी का बिखराव बेपर्दा हो गया।दरअसल बारासात जिले में कामदुनी बलात्कार कांड के बाद राज्यभर में छात्रों युवाओं के लगातार तेज होते अराजनीतिक प्रदर्शन तेज होते जाने की वजह से बंगाल की बुद्धिजीवियों की सुविधा की चुप्पी के लिए बड़ी आलोचना हो रही थी। अपनी अपनी अराजनीति और जनपक्षधरता साबित करने की गरज से कोलकाता में सिविल सासाइटी के अलग अलग धड़ों में भारी हलचल मची हुई है।आज के महाजुलूस की अगुवाई कर रहे थे कवि शंख घोष, अभिनेता सौमित्र चटर्जी, विख्यात अर्थशास्त्री अशोक मित्र, रंगकर्मी रुद्रप्रसाद सेन, संगीतकार शुभेंदु माइती,अध्यापक तरुण सान्याल जैसे लोग। अस्वस्थता की वजह से फिल्मकार महाजुलूस में शामिल नहीं हो सके तो शंख घोष ने उनका संदेश पढ़कर सुनाया।


सबसे खास बात रही कि इस महाजुलूस में कामदुनी में बलात्कार के बाद जिस छात्रा की हत्या कर दी गयी, उसके परिजन और गांव के लोग भी शामिल हुए। लेकिन कोलकाता के ज्यादातर जाने माने बुद्धिजीवी अनुपस्थित रहे।परिवर्तनपंथियों में सिऱ्फ तरुण सान्याल और समीर आइच ही दीखे। भीड़ के लिहाज से बहुत बड़ा जुलूस था, लेकिन यह ऐतिहासिक जुलूस सिविल सोसाइटी का समग्रता से प्रतिनिधित्व करने में बुरी तरह फेल रहा। सिंगुर नंदीग्राम प्रतिरोध आंदोलन में जो लोग सड़कों पर थे, उनमें से ज्यादातर नहीं दीखे। पर जो तब नहीं थे, वे ङी आज के महाजुलूस का नेतृत्व कर रहे थे।


बुद्धिजीवियों का परिवर्तनपंथी धड़ा अब कई टुकड़ों में बंटा नजर आ रहा है। महाश्वेता देवी और शुभोप्रसन्नों की अगुवाई में अब भी परिवर्तनपंथी बुद्धिजीवियों का बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ है।


आज के महा जुलूस के आह्वान पर शंख घोष के साथ ही मृणाल सेन, सौमित्र चटर्जी और महाश्वेता देवी के दस्तखत थे। दस्तखत थे नवनीता देव सेन के भी। नवनीता विदेश यात्रा पर हैं और कल ही महाश्वेता देवी ने मुख्यमंत्री के हक में बयान देकर खुद को जुलूस से अलग कर लिया। कामदुनी दुष्कर्म कांड पर वरिष्ठ साहित्यकार महश्वेता देवी ने राज्य सरकार की ओर से उठाये गये कदम का स्वागत किया है!महाश्वेता देवी ने एक बयान में कहा कि विगत दो सप्ताह से कामदुनी दुष्कर्म कांड को लेकर पूरे राज्य में खलबली मची हुई है। दुष्कर्म मामले की वह निंदा करती हैं। मृत युवती के परिवार व कामदुनी के लोगों के प्रति उनकी गंभीर संवेदना है। उन्होंने नारी हत्या व दुष्कर्म, निरीह लोगों की हत्या आदि घटनाओं का लगातार विरोध किया है।उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के समय से मरीचझापी, साईबाड़ी, नेताई, बानतला, नदिया धानतला, फूलबागान, कूचबिहार के फूलबाड़ी में इस तरह की घटनाएं घटी थीं। बाद में सिंगूर व नंदीग्राम जैसी घटनाएं हुईं. तापसी हत्याकांड आज भी लोगों को याद है।


राज्य में बढ़ते अपराध कर्म और स्त्री उत्पीड़न के खिलाफ कल हुए कालेज स्क्वायर के धरना में शामिल अपर्णा सेन, सुनंद सान्याल, कौशिक सेन और दूसरे तमाम लोग इस दलील के साथ आज के महाजुलूस में शामिल नहीं हुए कि इस जुलूस के आयोजकों में अनेक लोग सिंगुर और नंदीग्राम भूमि आंदोलन के वक्त खामोश थे और सत्तादल के साथ थे। उनका इशारा मृणाल सेन और सौमित्र चटर्जी की तऱफ था।


महाश्वेता देवी ने कहा है कि बानतला दुष्कर्म कांड में ज्योति बसु ने कहा था कि इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।

विगत 40 वर्षो से महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी हैं।उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि दुष्कर्म की घटनाएं राजनीतिक व सामाजिक समस्या है। लोग खुद की मिट्टी से कटते जा रहे हैं। पुरुष व नारी की भाषा बदल रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अदालत से आग्रह करने का निर्णय किया है कि एक माह के भीतर दुष्कर्मी को फांसी हो. यह एक उपलब्धि है। परिवर्तन की सरकार से मैं यही आशा कर रही थी। दुष्कर्म के संबंध में सरकार का यह सिद्धांत विगत के सरकारी निर्णयों के विपरीत है।


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दूसरी और,  पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में हुई बलात्कार एवं हत्या की घटनाओं पर विपक्ष एवं बुद्धिजीवियों के निशाने पर आईं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानीय समाचार चैनलों पर रेप पर चर्चा करने वाले पोर्नोग्राफी से जुड़े हुए हैं।बुद्धिजीवियों की रैली के एक दिन पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जो लेकर टीवी पर रेप को लेकर बहस कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर पॉर्न इंडस्ट्री से जुड़े हैं। ममता के राज में पिछले दिनों कामदुनी में एक कॉलेज स्टूडेंट का रेप हुआ था। उसके बाद लड़की का मर्डर कर दिया गया था। इसके बाद से राज्य में महिलाओँ की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। ममता इस बहस में शामिल बुद्धिजीवियों पर निशाना साध रही थीं। उसी क्रम में उन्होंने यह बात बर्द्धमान जिले के गालसी इलाके में एक रैली में कही।


उन्होंने कहा कि 'रेप के दो तीन वाकये हुए हैं। लेकिन हर शाम टीवी पर तथाकथित बुद्धिजीवी अश्लील चर्चा में लग जाते हैं। वे दिन-प्रतिदिन हमारी मां बहनों का अपमान करते हैं। कुछ चैनल दिवालिए हो गए हैं और वे बंगाल की जनता का अपमान कर रहे हैं।'ममता यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि पैनल चर्चा में आ रहे लोग सामाजिक कार्यकर्ता होने का ढोंग करते हैं, जबकि उनका मकसद सिर्फ पैसा बनाना होता है। उनके मुताबिक 'ये टॉक शो नहीं टका शो' के लिए आते हैं टीवी पर।


अजीबोगरीब से तर्क देते हुए ममता ने ये भी कहा कि इन बहसों के चलते बच्चे गलत चीजें सीख रहे हैं। उनके मुताबिक, बहस में शामिल हो रहे लोग सही नहीं कर रहे हैं। बच्चे जो चीज नहीं जानते हैं, वे उसे जानने लगते हैं। इसके अलावा उनका सदाबहार राग भी गूंजा। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी सीपीएम के इशारे पर कुछ टीवी चैनल ये सब कर रहे हैं।


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को आरोप लगाया कि सत्ता में लौटने के लिए माकपा ने उनकी हत्या की खातिर माओवादियों से हाथ मिलाया है। ममता ने माकपा के साथ साथ साथ कांग्रेस और भाजपा की भी आलोचना की। ममता ने उत्तरी 24 परगना जिले के बोंगाईगांव के पास कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ता में लौटने के प्रयास के तहत माकपा ने उनकी हत्या का खाका तैयार करने में माओवादियों से हाथ मिलाया है। उन्होंने कहा कि उनके इरादे कभी सफल नहीं होंगे। ममता अपने पहले पंचायत चुनाव अभियान में बोल रही थीं।


बलात्कार के बाद हत्या की शिकार हुई कालेज छात्रा के परिवार को सांत्वना देने गई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बारासात जिले में ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा जिसके चलते वह आपा खो बैठी।




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