Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter

Memories of Another day

Memories of Another day
While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Wednesday, February 22, 2012

बांग्ला साहित्य प्रेमियों ने दिखायी अज्ञेय में जबर्दस्त रूचि


बांग्ला साहित्य प्रेमियों ने दिखायी अज्ञेय में जबर्दस्त रूचि

Wednesday, 22 February 2012 15:26

कोलकाता, 22 फरवरी (एजेंसी) हिन्दी के शीर्ष रचनाकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय की जन्मशताब्दी समारोह में आज बांग्ला लेखकों, अभिनताओं और साहित्य प्रेमियों ने गहरी रूचि दिखायी तथा इस अवसर पर अज्ञेय की कुछ कविताओं का बांग्ला अनुवाद का पाठ बांग्ला फिल्मों के चर्चित अभिनेताओं एवं अभिनेत्रियों ने किया। देश की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता में आयोजित अज्ञेय जनमशताब्दी के उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय, वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह, वरिष्ठ कला समीक्षक एवं कवि अशोक वाजपेयी सहित कई लेखकों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कोलकाता और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अज्ञेय के मानस पर गहरी छाप छोड़ी थी। 
बांग्ला के वरिष्ठ लेखक एवं उपन्यासकार गंगोपाध्याय ने कहा कि अज्ञेय की रचनाओं में कोलकाता सहित पूरे बंगाल की संस्कृति की गहरी समझ झलकती है। गुरुदेव टैगोर ने उनके मन पर काफी छाप छोड़ी थी। 
गंगोपाध्याय ने कहा कि उनकी अज्ञेय के साथ दो बार मुलाकात हुई थी। उन मुलाकातों के दौरान अज्ञेय बांग्ला में बोले। गंगोपाध्याय ने इस बात की ओर विशेष ध्यान दिलाया कि अज्ञेय त्रुटिहीन बांग्ला बोलते थे।
समारोह में बांग्ला फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता सौमित्र सेन ने अपनी गुरु गंभीर आवाज में अज्ञेय की चर्चित कविता ''नदी के द्वीप'' का बांग्ला अनुवाद पढ़ा। साथ ही अभिनेत्री अर्पिता चटर्जी ने उनकी कविता ''मैंने धूप से कहा'' के बांग्ला अनुवाद का भावप्रवण शैली में पाठ किया।
बांग्ला फिल्मों की चर्चित युवा अभिनेत्री रितुपर्णा सेन गुप्ता ने इस अवसर पर अज्ञेय की कविता ''नदी की बांक पर छाया'' का ''शेडो एट द बैंड आफ रिवर'' शीर्षक से बांग्ला अनुवाद का पाठ किया।

समारोह में पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्य एवं बांग्ला अभिनेत्री देवाश्री राय ने बांग्ला में स्वागत गीत गाया।
बांग्ला के प्रसिद्ध एवं वरिष्ठ कवि शंख घोष सहित तमाम बांग्ला रचनाकार और साहित्य प्रेमियों की इस अवसर पर उपस्थिति रही जिससे पता लगता है कि बांग्ला पाठक हिन्दी सहित अन्य भाषाओं के रचनाकारो को लेकर भी काफी सजग है। 
उल्लेखनीय है कि अज्ञेय ने अपने साहित्यिक एवं पत्रकारिता जीवन की शुरूआत भी कोलकाता से विशाल भारत समाचारपत्र के संपादक के तौर पर की थी। कोलकाता में ही अज्ञेय की मुलाकात कपिला मलिक से हुई और बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। समारोह के आयोजक प्रभा खेतान फाउंडेशन के नाम भेजे गये एक पत्र में कपिला वात्सायन ने अज्ञेय के साथ कोलकाता में बिताये गये अपने दिनों का स्मरण किया। इस पत्र को भी समारोह में पढ़ा गया।
कोलकाता में ही देश का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ सम्मान अज्ञेय को प्रसिद्ध नृत्यांगना रूक्मिणी देवी अरूनडेल ने प्रदान किया था। 
अज्ञेय टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति गीतांजलि से बेहद प्रभावित थे और अपनी रचनाओं में उन्होंने इसका कई बार उल्लेख किया। अज्ञेय की टैगोर से मुलाकात शांतिनिकेतन में हजारी प्रसाद द्विवेदी ने करायी थी।      कई बांग्ला साहित्य प्रेमियों ने स्वीकार किया कि जबकि पूरे देश में टैगोर की जन्मशताब्दी मनायी जा रही है ऐसे में हिन्दी के शीर्ष लेखक अज्ञेय के जन्मशताब्दी समारोह का कोलकाता में आयोजन निश्चित तौर पर सराहनीय प्रयास है।


No comments:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...