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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Friday, February 8, 2013

रेप तो वर्षों से चला आ रहा है

रेप तो वर्षों से चला आ रहा है



चर्चित लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति राय ने दिल्ली रेप कांड को लेकर मचे बवाल के हवाले से बहुत वाजिब सवाल उठाया है कि- '' ये रेप तो वर्षों से चला आ रहा है.ये मानसिकता में समाया हुआ है. गुजरात में मुसलमानों के साथ हुआ, कश्मीर में सुरक्षा बल करते हैं बलात्कार, मणिपुर में भी ऐसा होता है लेकिन तब तो कोई आवाज़ नहीं उठाता है. खैरलांजी में दलित महिला और उसकी बेटी का रेप कर के उन्हें जला दिया गया था. तब तो ऐसी आवाज़ नहीं उठी थी.एक सामंती मानसिकता है लोगों की जो तभी आवाज़ उठाती है जब बड़ी जाति के, प्रभुत्व वाले लोगों के साथ दिल्ली में कुछ होता है.आवाज़ उठनी चाहिए. जो हुआ है दिल्ली में उसके लिए हल्ला तो मचना चाहिए लेकिन ये हल्ला सिर्फ मिडिल क्लास लोगों को बचाने के लिए नहीं होना चाहिए.छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिला सोनी सोरी के साथ भी कुछ हुआ था आपको याद होगा तो. उनके जननांगो में पत्थर डाले गए थे.पुलिस ने ऐसा किया लेकिन तब तो किसी ने आवाज़ नहीं उठाई थी. उस पुलिस अधिकारी को तो साहस का अवार्ड मिला.कश्मीर में जब सुरक्षा बल गरीब कश्मीरियों का रेप करते हैं तब सुरक्षा बलों के खिलाफ़ कोई फांसी की मांग नहीं करता.जब कोई ऊंची जाति का आदमी दलित का रेप करता है तब तो कोई ऐसी मांग नहीं करता.एक सामंती मानसिकता है हम लोगों के अंदर.  बलात्कार एक भयंकर अपराध है लेकिन लोग क्या करते हैं. जिस लड़की का रेप होता है उसे कोई स्वीकार क्यों नहीं करता. कैसे समाज में रहते हैं हम. कई मामलों में जिसका बलात्कार होता है उसी को परिवार के लोग घर से निकाल देते हैं.विरोध होना चाहिए लेकिन चुन चुन के विरोध नहीं होना चाहिए. हर औरत के रेप का विरोध होना चाहिए. ये दोहरी मानसिकता है कि आप दिल्ली के रेप के लिए आवाज़ उठाएंगे लेकिन मणिपुर की औरतों के लिए, कश्मीर की औरतों के लिए और खैरलांजी की दलितों के लिए आप आवाज़ क्यों नहीं उठाते हैं.रेप का विरोध कीजिए इस आधार पर नहीं कि वो दिल्ली में हुआ है या मणिपुर में या किसी और जगह. मैं बस यही कह सकती हूं...''
चर्चित लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति राय ने दिल्ली रेप कांड को लेकर मचे बवाल के हवाले से बहुत वाजिब सवाल उठाया है कि- '' ये रेप तो वर्षों से चला आ रहा है.ये मानसिकता में समाया हुआ है. गुजरात में मुसलमानों के साथ हुआ, कश्मीर में सुरक्षा बल करते हैं बलात्कार, मणिपुर में भी ऐसा होता है लेकिन तब तो कोई आवाज़ नहीं उठाता है. खैरलांजी में दलित महिला और उसकी बेटी का रेप कर के उन्हें जला दिया गया था. तब तो ऐसी आवाज़ नहीं उठी थी.

एक सामंती मानसिकता है लोगों की जो तभी आवाज़ उठाती है जब बड़ी जाति के, प्रभुत्व वाले लोगों के साथ दिल्ली में कुछ होता है.
आवाज़ उठनी चाहिए. जो हुआ है दिल्ली में उसके लिए हल्ला तो मचना चाहिए लेकिन ये हल्ला सिर्फ मिडिल क्लास लोगों को बचाने के लिए नहीं होना चाहिए.छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिला सोनी सोरी के साथ भी कुछ हुआ था आपको याद होगा तो. उनके जननांगो में पत्थर डाले गए थे.पुलिस ने ऐसा किया लेकिन तब तो किसी ने आवाज़ नहीं उठाई थी. उस पुलिस अधिकारी को तो साहस का अवार्ड मिला.
कश्मीर में जब सुरक्षा बल गरीब कश्मीरियों का रेप करते हैं तब सुरक्षा बलों के खिलाफ़ कोई फांसी की मांग नहीं करता.
जब कोई ऊंची जाति का आदमी दलित का रेप करता है तब तो कोई ऐसी मांग नहीं करता.एक सामंती मानसिकता है हम लोगों के अंदर. बलात्कार एक भयंकर अपराध है लेकिन लोग क्या करते हैं. जिस लड़की का रेप होता है उसे कोई स्वीकार क्यों नहीं करता. कैसे समाज में रहते हैं हम. कई मामलों में जिसका बलात्कार होता है उसी को परिवार के लोग घर से निकाल देते हैं.

विरोध होना चाहिए लेकिन चुन चुन के विरोध नहीं होना चाहिए. हर औरत के रेप का विरोध होना चाहिए. ये दोहरी मानसिकता है कि आप दिल्ली के रेप के लिए आवाज़ उठाएंगे लेकिन मणिपुर की औरतों के लिए, कश्मीर की औरतों के लिए और खैरलांजी की दलितों के लिए आप आवाज़ क्यों नहीं उठाते हैं.रेप का विरोध कीजिए इस आधार पर नहीं कि वो दिल्ली में हुआ है या मणिपुर में या किसी और जगह. मैं बस यही कह सकती हूं...''

------------Sunil Kumar 'suman'


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