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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti devi were living

Tuesday, August 20, 2013

अब आसमान में भी छेद होने लगा,लगातार बारिश से बंगाल में बाढ़ की आशंका

अब आसमान में भी छेद होने लगा,लगातार बारिश से बंगाल में बाढ़ की आशंका


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


सही में कई दिनों से यही हाल है।लगातार बारिश हो रही है जैसे कि आसमान में छेद ह गया हो।मौसम विबाग के मुताबिक अभी बंगाल भर में यह दुर्योग जारी रहना है।कोलकाता और नयी राजधानी बनने को आतुर हावड़ा समेत तमाम नगर निगम,पालिकओं,शहर,कस्बे और गांव जलप्लावित हैं।घर से बाहर निकलने पर समुंदर लांघना पड़ रहा है।ट्रेनेंतक अनियमित हैं। बस सेवा बदहाल.नरकयंत्रमा है यह।ऊपर से बंगाल में हिमालयी सुनामी की भी आशंका है।


हावड़ा के तीसों वार्ड में पानी भर गया है तो कोलकाता और उपनगरों में जलनिकासी का कोई इंतजाम है ही नहीं।इस पर तुर्रा यह कि कोलकाता के मेयर शोभनदेव और मंत्री फिरहाद हकीम में ठन गयी है।अंतर्कलह से इन महामहिमों को फुरसत मिले तब न वे हम नागरिकों की सुधि ले पायेंगे।


हावड़ में जहां तहां घुटने घुटने भर जल है तो कोलकाता की सड़कों पर नावें चल सकती हैं।उपनगरों में नदियों और झीलों के दृश्यहै। बीटीरोड,जीटीरोड,दमदम रोड,सोनारपुर रोड,जैसोर रोड,सेंच्रल एवेन्यू,महात्मागांधी रोड जैसी तमाम जीवनरेखाएं नदियों में तब्दील हैं और जनपद सारे डूब में शामिल है।आंदोलित दार्जिलिंग तक बाकी बंगाल से कट गया है।ऩये राइटर्स एचआरबीसी भवन के चारों तरफ भी पानी।दीदी के दक्षिण कोलकाता में बी कोई राहत नहीं है।कोलकाता और हावड़ा नगरनिगम के संयोजित इलाके और प्रस्तावित विधाननगर कोरपोरेशन के तमाम इलाके जलमग्न हैं।हावड़ा के मंगलाहाट का कोरोबार ठंडा है तो सांतरागाछी,टिकियापाड़ा,लिलुआ और नारकेलडांगा रेलवे यार्डों में पानी है। बीबीडी बाग को जोड़ने वाली रेल लाइन जलमग्न है और सियालदह उत्तर,सियालदह दक्षिण और हावड़ा खड़गपरि हावड़ा बंडेल हावड़ा डानकुनी सेक्शन भी जलबंदी हैं।ज्यादातर ट्रेनें लेटलतीफ हैं।


गोरखा जनमुक्ति के कब्जे में बंगाल के पहाड़ों की हालत और बुरी है।वहां तमाम घाटियां लावारिश है।भूस्खलन सिलसिला है।पर्यटक हीन वीरान पहाड़ों में,श्मसान बने बंद चायबागानों में मूसलादार बारिश जारी है। पेयजल नहीं,राशन नहीं, बिजली नहीं।आंधी में अनेक पेड़ उखड़ गये।भूस्खलन से तमाम रास्ते अवरुद्ध।रास्ता साफ करने का कोई उपक्रम भी नहीं।न राहत और न बचाव का इउंतजाम है।


उत्तर और दक्षिण बंगाल में, जंगल महल में और कोयलांचल में भी सर्वत्र बाढ़ और विपर्यय की दस्तक है।


महानगर कोलकाता के आरपार अनंत जलछवियां तिर रही हैं।घनी आबादी वाले हावड़ी की हालत और खराब।लगातार बारिश से आम जनजीवन ठप है।कारोबार बाधित।भारी वर्षण से गोल पार्क,पार्क सर्कस,सेंट्रल एवेन्यू, ठनठनिया काली बाड़ी, स्टुडियोपाड़ा टाली गंज,सौरभ गांगुली का बेहाला,महाश्वेता दी का गोल्फ ग्रीन,फिल्मनगरी टालीगंज, कोलकाता का कारोबारी दिल बड़ा बाजार,मूर्तियां गढ़ रहा कुम्हारटोली,दक्षिण में  गड़िया,बाघा जतीन, सोनारपुर, निउ अलीपुर का वीआईपी इलाका,जोधपुर पार्क,रामगढ़,धर्मतल्ला, कालीघाट, साल्टलेक,लेक टाउन, हवाई अड्डा से लेकर बैरकपुर और बारासात तक जल ही जल है। निकासी कहीं भी नहीं।


मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण बंगाल हो या उत्तर बंगाल बारिश से त्काल राहत की कोई संबावना है ही नहीं। तमाम नदियां बेहिसाब उफन रही हैं।आगे बारिश जारी रहने पर क्या होगा  वह जैसे नामालूम है वैसे ही नामालूम हैं आपदा प्रबंधन के ऐहतियाती इंतजामात भी।समुद्री तूफान आयला पीड़ित सुंदरवन के डेल्टा प्रदेश में हर इसाके को नदियां काटती हैं और जोड़ती हैं नदियां ही।गंगासागर पुण्यक्षेत्र तो खैर द्वीप ही हैं। इन इलाकों में आयला से क्षतिग्रस्त नदीतटबंध अभी बने ही नहीं है।जमीन अधिग्रहण का विवाद भारी है और अब वही सारी जमीन खारा पानी के हाथों बेदखल है।जलमग्न हैं सिंगुर और नंदीग्राम के परिवर्तन स्थल भी।जल प्लावित है वे तमाम इलाके जहां पंचायती राज के बहाने सत्ता दखल की आत्मघाती अराजक हिंसा से अब भी खून की नदियां बह रही हैं।पानी  और खून एकाकार हैं।एक रंग है।


समुद्रतटवर्ती इलाकों में भारी वर्षा की संभावना है।इस विपर्यय के कभी भी पड़ोसी राज्य ओड़ीशा और झारखंड और उसके भी पार आंध्र, बिहार और छत्तीसगढ़ को छू लेने की प्रबल आशंका है।जहां बंगाल से निम्नदबाव स्तानांतरित हो जाने के आसार पूरे हैं।निम्न दबाव के अन्यत्र स्थानातंरित होने के बावजूद बंगाल में राहत की संभावना नहीं है।हवाओं में जलीयवाष्प प्रचुर है जो वर्षा की निरंतरता जारी रखेगी आर्थिक नीतियों की तरह।


डायमंड हारबार से लेकर दीघा समुद्रतट तक जारी है प्रबल वर्षण।डायमंड हारबर में सोमवार सुबह तक 128 मिमी, बारुईपुर में 110 मिमी और मेदिनीपुर में 65 मिमी वर्षा हो चुकी है।



बंगाल की खाड़ी में पिछले बीस दिनों में सात सात दफा घुर्मावर्त की सृष्टि हुई है।लगातार तीन हफ्ते से बारिश चल रही है दुर्गोत्सव की उलटी गिनती के साथ।अब आशंका यह है कि पूजा बाजार कहीं पानी से भींज न जाये और पंडालों का जलवा जलप्लावित न हो जाये।जाहिर है गांगेयबंगाल में वर्षा की अति सक्रियता जारी है।


मेदिनीपुर समेत कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह ठप है।जंगल महल संक्रमित है। मौसम विभाग ने बाकायदा चेतावनी जारी कर दी है कि झारखंड में खूब बरसेंगे मेघ।गंगा ,पद्मा,तिस्ता , तोर्सा , इछ्छामती, गोसाबा,मातला, बूढ़ी गंगा,मयुराक्षी,काना मयुराक्षी,कोपाई,ब्राह्मणी, द्वारिका, दामोदर, रुपनारायण,सुवर्णरेखा उफन रही हैं। उफन रही हैं छोटी बड़ी नदियां उफन रही हैं झीलें - हिजल,बेलुल,बसिया, तेलकर, शकीरा, लांगरहाटा।नाले भी तमाम उफान पर हैं।और तो और, उफन रहे हैं तमाम राजमार्ग। मुर्शिदाबाद और मालदह में नदी कटाव के शिकार लहो रहे हैं जनपद। तो कोयलांचल में उत्पादन और ढुलाई बाधित हैं।मुर्शिदाबाद,वीरभूम और वर्दमान जिलों के कम से कम चौदह ब्लाकों के करीब तीस लाख लोगों के दरवाजे बाढ़ की भारी दस्तक है।


सिंचाई मंत्री राजीव बंद्योपाध्याय भी मानते हैं कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में बाढ़ नियंत्रण की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।ठंडे बस्ते में  हैं सुंदरवन नदी तटबंध परियोजनाओं से लेकर कांदि मास्टर प्लान तक।केंद्रीय रेल राज्यमंत्री अधीर चौधरी तक अपने इसाके के जलबंदी जनगण की कुछ खास मदद नहीं कर पा रहे हैं।जलंगी राष्ट्रपति प्रणवमुखर्जी का लोकसबा निर्वाचन क्षेत्र है और वही पद्मा हर साल कहर बरपाती है। सिलसिला जारी है। जारी रहेगा।


भारी वर्षा के कारण सब्जियों की कीमतें आसमान चूम रही हैं।


कोलकाता में बारिश का मिजाज भांपते हुए सिंचाई मंत्री ने दक्षिम बंगाल के जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस मार्फत ताजा हालात का जायजा लिया है और एहतियाती इंतजामात के निर्देश दिये हैं।लेकिन बाढ़ नियंत्रण की तैयारी कुछ भी न हो पाने की वजह से इस कवायद से क्या फायदा होना है,उन्हें भी नहीं मालूम।


हावड़ा, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर में रविवार से लगातार बारिश हो रही है।इन जिलों में बाढ़ का खतरा प्रबल है तो उत्तर व दक्षिण 24 परगना में हालात और बुरे हैं। दामोदर घाटी परियोजना के बांधों से पानी छूटने पर आसनसोल से लेकर दुर्गापुर तक समूचे शिल्पांचल के जलप्लावित हो जाने की आशंका है।वैसे यह सारा इलाका सालाना बाढ़ झेलने की रस्म अदायगी के लिए अभ्यस्त है।





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